July - december 2024 (PART-2)
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SHODH BHUMI
[A Peer-reviewed, Refereed, Bi-Annual, Multidisciplinary & Multilingual Research Journal of Education & Pedagogy]
वर्ष - 1 | अंक - 2 | जुलाई - दिसंबर 2024
Contents/ विषय सूची
36. श्री देवनारायण भगवान की फड
राखी सिंह राठौड़, डॉ. मनोज टेलर
श्री देवनारायण की फड़ राजस्थान के लोक जीवन की एक अत्यंत प्राचीन और समृद्ध मौखिक व दृश्य कला परम्परा है, भगवान देवनारायण (विष्णु के अवतार) के जीवन, पराक्रम, सघर्ष और चमत्कारों की चित्रित किया जाता है। देवनारायण की फड़ राजस्थानी में देवनारायण की फड़फड़ा कहते हैं। ये कपड़े पर बने चित्र हैं जिनमें देवनारायण की कथा को दर्शाया गया है। इसे कपड़े पर विभिन्न रंगों (विशेषकर लाल, पीले और हरे) से उकेरा जाता है, यह राजस्थान की सबसे लंबी और लोकप्रिय फड़ मानी जाती है।
राजस्थान में देवी-देवताओं की गाथाओं का कपड़े पर बने चित्रों के माध्यम से पट-चित्रण किया जाता है। जिसे राजस्थानी भाषा में फड़ कहा जाता है। यह लोक नाट्य, गायन, वादन, मौखिक साहित्य, चित्रकला व लोकधर्म का एक अनूठा संगम है।
मुख्य शब्द – देवनारायण, राजस्थानी, फड़, चमत्कार।
1. सायर, देवीलाल वर्मा रामगींडा, 2018, राजस्थानी लोकनृत्य, भारतीय लोककला मण्डल पंचशील, उदयपुर राजस्थान 313001 एः पृ.सं. 5 से 9
2. डॉ, कल्ला नंदलाल, 2000, राजस्थानी लोक साहित्य एवं संस्कृति सुदर्शन कम्प्यूटर सिस्टम जोधपुर (पृ.सं. 115 से 126)।
3. आहूजा आर.डी., 2002 राजस्थान लोक संस्कृति और साहित्य कुंज, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत नेहरू भवन 5 इंस्टीट्यूशनल एरिया फेज-11 बंसतकुज, नई दिल्ली-110070 द्वारा प्रकाशित (पृ.सं. 105 से 115)
4. अग्रवाल, गोविन्द, 2013 राजस्थानी लोकगीत, लोक संस्कृति, शोध संस्थान नगर श्री चूरू, ट्रस्ट, चूरू राजस्थान (पृ.सं. 1 से 175)
5. रानी लक्ष्मी कुमारी चुण्डावत बगड़ावत देवनारायण महागाथा, पंचषील प्रकाशन, जयपुर 1993 (पृ.सं. 614 से 615)
6. पं. बंशीधर शर्मा, बगड़ावत गाथा, जोशी पुस्तक भवन किशनगढ़, (पृ.सं. 1 से 69)
7. वर्मा गींडाराम सायर, देवीलाल 2018 राजस्थान के भारतीय लोक कला मण्डल उदयपुर राजस्थानी ग्रंथागार, जोधपुर (पृ.सं. 70 से 72)
