Abstract
रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने शिक्षा के द्वारा मनुष्य के भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार के विकास पर बल दिया है, शिक्षा की पाठ्यचर्या में राष्ट्रीय भाषाओं, संस्कृतियों और ज्ञान-विज्ञान को स्थान दिया, शिक्षण की प्राचीन विधियों को नये शिक्षण सिद्धांतो के प्रयोग द्वारा उपयोगी बनाया, शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक एवं शिक्षार्थी दोनों को ब्रह्मचर्य पालन का उपदेश दिया। बच्चों के साथ प्रेम एवं सहानुभूति पूर्ण व्यवहार और विद्यालयो को समाजसेवा एवं ग्रामोद्धार का केन्द्र बनाया। इसके साथ-साथ इन्होंने जनशिक्षा, स्त्री शिक्षा मानवतावादी शिक्षा का स्वरूप प्रदान किया और राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा का श्री गणेश किया। रवीन्द्रनाथ टैगोर के शैक्षिक विचारों का प्रभाव आज भारतीय शिक्षा में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
मूल शब्द : रवीन्द्रनाथ टैगोर का परिचय, अध्ययन का उद्देश्य, अध्ययन विधि, रवीन्द्रनाथ टैगोर का शैक्षिक दर्शन, शिक्षा का सम्प्रत्यय, शैक्षिक दर्शन की वर्तमान में उपयोगिता।
