रामचरित मानस में लोकतत्त्व

सारांश


भक्ति आंदोलन हिंदी साहित्य के इतिहास का अत्यंत गौरवपूर्ण कालखंड है। भक्ति काल की लोकधर्मिता के फलस्वरूप ही यह भावनात्मक एकता कायम हो सकी थी, जिसका आधार था भक्त कवियों का सर्वत्र लोक जीवन और लोक भाषाओं से गहरा संबंध है। भक्ति साहित्य सामंत विरोधी लोक जागरण का साहित्य है। अतः प्रस्तुत शोध पत्र में रामचरित मानस में लोक तत्व की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्धारण किया गया है। शोध पत्र में प्रस्तावना, शब्द कुंजी व लोक तत्व की व्युत्पत्ति एवं विभिन्न विद्वानों के मतों को दिया है साथ ही लोक समाज, लोकसंस्कृति, लोक जीवन को भी विश्लेषित किया है। साहित्य से लोकतत्त्व का संबंध एवं हिंदी में लोक तत्व की भूमिका का निर्धारण करते हुए रामचरित मानस में लोक तत्त्व को बताया गया है।

कुंजी शब्द: लोकतत्व, लोक समाज, मर्यादा पुरुषोत्तम, साधनावस्था, लोक संस्कृति,
लोक जीवन, जातीय, समुदाय, धर्मपरायणता, वनगमन।

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